बूमरैंग सख्त लकड़ी की एक मुड़ी हुई छड़ होती है, जो आस्ट्रेलिया और दूसरे देशों में शिकार या लड़ाई के काम आती है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण किस्म वह होती है, जो निशाना चूकने पर वापस फेंकने वाले के पास आ जाती है। इसका विकास आस्ट्रेलिया के लोगो ने किया था और इसकी लंबाई 12 से 30 इंच तक होती है। इस बूमरैंग का वजन 340 ग्राम तक होता है। जब इसे पूरी शक्ति के साथ फेंका जाता है, तो यह 45 मीटर की ऊंचाई पर चक्कर काटता है और फिर कुछ छोटे छोटे चक्कर काटने के बाद फेंकने वाले के पास वापस आ जाता है। इसके वापस लौटने का कारण यह माना जाता था कि हवा इसके निचले सपाट हिस्से पर दबाव डालती हुई ऊपरी सतह पर निकलती है और इसी दाब के कारण यह वापस लौटती है। बाद में एक स्कॉटिश शोधकर्ता ने पाया कि इसे फेंकने का तरीका और वायु दाब, दोनों ही इसे वापस लाने का काम करते है। बूमरैंग हमेशा हाथ को कंधे से नीचे रख फेंका जाता है। फिर इसे फेंकते समय कलाई को भी कुछ इस तरह घुमाया जाता है कि बूमरैंग पर हवा के दाब के साथ ही इसका दाब भी बनता है और इसी दाब के कारण यह वापस लौटता है।
कुछ खास मानसिक रोगों का उपचार करने के लिए बिजली के झटके देकर मरीज का इलाज किया जाता है। इस पद्धति को एलेक्ट्रोशॉक थेरेपी कहते है। मानसिक रोग का इलाज करने के लिए पहली बार 1938 मे...

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